भारत में भाषाई विविधता क्या है?

भारत दुनिया के उन अनूठे देशों में से एक है जहां भाषाओं में विविधता की विरासत है। भारत के संविधान ने 22 आधिकारिक भाषाओं को मान्यता दी है। हालांकि आधिकारिक तौर पर यहाँ 122 भाषाएं हैं, भारत के लोगों के भाषाई सर्वेक्षण में 780 भाषाओं की पहचान की गई है, जिनमें से 50 पिछले पांच दशकों में विलुप्त हो चुकी हैं।

भाषाई विविधता और बहुभाषिकता से आप क्या समझते हैं?

ब्लूम फील्ड के अनुसार – ”बहुभाषिकता की स्थिति तब पैदा होती है जब व्यक्ति किसी ऐसे समाज में रहता है जो उसकी मातृभाषा से अलग भाषा बोलता है और उस समाज में रहते हुए वह उस अन्य भाषा में इतना पारंगत हो जाता है कि उस भाषा का प्रयोग मातृभाषा की तरह कर सकता है।”

बौद्धिक विकास में बहुभाषिकता कैसे सहायक है?

बहुभाषिकता और बौद्धिक विकास बहुभाषिकता से मनुष्य का बौद्धिक विकास होता है। देश-विदेश के अनेक भाषावैज्ञानिकों के इस संदर्भ में किए गए अध्ययन इसी तथ्य की पुष्टि करते हैं कि द्विभाषिक बच्चों में शब्द और अर्थ के संबंध की बेहतर समझ विकसित होती है।

बहुभाषिक कक्षा का अर्थ ?

बहुभाषिक कक्षा का अर्थ उस कक्षा से है जहाँ अलग अलग भाषाओँ वाले बच्चे एक साथ सामान शिक्षा ग्रहण करते हैं। बहुभाषावाद के माध्यम से भाषा कक्षा में सभी विद्यार्थियों को एक साथ पढाई जा सकती है।

बहुभाषी कक्षा कक्ष की आधारभूत समस्याएं क्या है?

ऐसा माना जाता है कि कक्षा में अलग-अलग भाषाओं के इस्तेमाल से बच्चों को उलझन होती है। जबकि स्थिति इसके ठीक विपरीत होती है। कक्षा में बहुभाषी माहौल के कारण हर बच्चा अपनी बात रखने में सहज महसूस करता है।

बहुभाषिक कक्षा में शिक्षण प्रक्रिया के दौरान शिक्षक को सदैव विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में बोलने के अवसर प्रदान करने चाहिए ताकि भाषाई विविधता वाली कक्षा में आने वाली समस्यायों का समाधान हो सके। बच्चों को प्राथमिक स्तर की विद्यालयी शिक्षा उनकी मातृभाषा में इसलिए भी देनी चाहिए क्यूंकि इससे शिक्षण अधिगम प्रक्रिया सरल एवं छात्रों के लिए सहज हो सके। इस प्रकार बहुभाषिक कक्षा में बच्चों की भाषाएँ संसाधन के रूप में कार्य कर विभिन्न भाषाओं के बच्चे भाषा के नए अवसर तथा अभिव्यक्ति के भिन्न-भिन्न  माध्यम लेकर कक्षा में आते हैं। अतः हम कह सकते हैं बहुभाषिकता कक्षा में बच्चों की भाषाएं संसाधन के रूप में कार्य करती है। 

बच्चों का भाषाई विकास जन्म पूर्व ही आरंभ हो जाता है। बच्चों के भाषा विकास में परिवार तथा वातावरण का मुख्य योगदान होता है किसी क्षेत्र विशेष में बोली जाने वाली भाषा को बोली अथवा आम बोलचाल की भाषा कहते है। यह भाषा का अनौपचारिक रूप होता है परन्तु भाषा विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अलग अलग भाषाई परिवेश से आने वाले बच्चों के अनुभव भी अलग-अलग होते हैं। बच्चे का औपचारिक भाषा शिक्षण विधालय आने पर आरंभ होता है। एक शिक्षक को

इस बहुभाषिकता को संसाधन के रूप में लेना चाहिए और शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को व्यवस्थित और प्रभावी बनाना चाहिए 

बोल चाल की भाषा प्रयोग करने के लाभ निम्नलिखित हैं  

  • सामाजिक रूप से अधिगम प्रक्रिया को व्यवस्थित करती है। 
  •  बच्चों में शिक्षण के प्रति रुचि पैदा करती है। 
  • औपचारिक शिक्षण में सहायक होती है 
  • बच्चों को अन्य भाषाओं का ज्ञान कराती है 
  • बच्चों को मातृ भाषा अभिव्यक्ति के अवसर प्रदान करती है 

Questions बहुभाषिक कक्षा में बच्चों की भाषाएँ ?
AnswerA) संसाधन के रूप में कार्य कर सकती है
B) शिक्षक के लिए बेहद जटिल चुनौती है
C) आकलन की प्रक्रिया को बाधित करती है
D) भाषा सीखने की प्रक्रिया को बाधित करती है
A) संसाधन के रूप में कार्य कर सकती है

Questions बच्चे बोल-चाल की भाषा का अनुभव लेक विद्यालय आते हैं। इसका निहितार्थ है कि ?
AnswerA) बच्चों को बोल-चाल की भाषा न सिखाई जाए
B) बच्चों के भाषायी अनुभवों का उचित प्रयोग किया जाए
C) बच्चों की बोल-चाल की भाषा को सुधारा जाए
D) बच्चों के भाषायी अनुभवों को कक्षा के बाहर रखा जाए
B) बच्चों के भाषायी अनुभवों का उचित प्रयोग किया जाए

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