Notesइस आर्टिकल में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 की सभी महत्वपूर्ण जानकारी दी है और साथ ही राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 से संबंधित सभी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर को भी इस पोस्ट में शामिल किया गया है, जो कि पिछली परीक्षाओं में पूछे गए थे

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005, भारत की शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण की राष्ट्रीय परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा 1975, 1988, 2000 और 2005 में प्रकाशित चार राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा में से एक है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा भारत में स्कूल शिक्षा कार्यक्रमों के भीतर पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण प्रथाओं को बनाने के लिए रूपरेखा प्रदान करती है।

एन.सी.एफ. 2005 टैगोर के निबंध ‘सभ्यता और प्रगति’ से उद्धरण के साथ शुरू होता है जिसमें कवि हमें याद दिलाता है कि बचपन में ‘रचनात्मक भावना’ और ‘उदार खुशी’ एक कुंजी हैं, जिनमें से दोनों को एक नासमझ वयस्क समाज द्वारा विकृत किया जा सकता है।नेशनल स्टीयरिंग कमेटी की स्थापना प्रोफेसर यशपाल की अध्यक्षता में की गई थी।अंततः 7 सितंबर, 2005 को सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ एजुकेशन (सीएबीई) में चर्चा और पारित किया गया।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 के 5 मार्गदर्शक सिद्धांत है।

  • ज्ञान को स्कूल के बाहर के जीवन से जोड़ना।
  • पढ़ाई रटन्त प्रणाली से मुक्त हो, यह सुनिश्चित करना।
  • पाठ्यचर्या का इस तरह संवर्धन कि वह बच्चों को चहुँमुखी विकास के अवसर मुहैया करवाये बजाए इसके कि वह पाठ्य पुस्तक केंद्रित बनकर रह जाये।
  • परीक्षा को अपेक्षाकृत अधिक लचीला बनाना और कक्षा की गतिविधियों से जोड़ना।
  • एक ऐसी अधिभावी पहचान का विकास जिसमें प्रजातांत्रिक राज्य व्यवस्था के अंतर्गत राष्ट्रीय चिंताएं समाहित हों।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) 2005 की मुख्य विशेषता

  • सीखने को एक आनंददायक अनुभव बनाने के लिए बोझ के बिना सीखना और परीक्षा के लिए एक आधार बनने और बच्चों से तनाव को दूर करने के लिए पाठ्यपुस्तकों से दूर जाना । इसने पाठ्यक्रम के डिजाइन में बड़े बदलावों की सिफारिश की।
  • आत्म-निर्भरता और व्यक्ति की गरिमा की भावना विकसित करने के लिए जो सामाजिक संबंधों के आधार के लिए होगा और समाज में अहिंसा और एकता की भावना विकसित करेगा।
  • 14 साल की उम्र तक एक बच्चे को केंद्रित दृष्टिकोण विकसित करना और सार्वभौमिक नामांकन और प्रतिधारण को बढ़ावा देना।
  • छात्रों में एकता, लोकतंत्र और एकता की भावना पैदा करने के लिए पाठ्यक्रम हमारी राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने और नई पीढ़ी के पुनर्मूल्यांकन के लिए सक्षम है।
  • जेपी नाइक ने भारतीय शिक्षा के लिए समानता, गुणवत्ता और मात्रा को अनन्य त्रिकोण के रूप में वर्णित किया है।
  • सामाजिक संदर्भ के संबंध में NCF 2005 ने सुनिश्चित किया है कि जाति , पंथ , धर्म और लिंग के बावजूद सभी को एक मानक पाठ्यक्रम प्रदान किया जाता है।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा  को 5 भागों में बांटकर वर्णित किया गया है ।

1. परिप्रेक्ष्य (Perspective)

2. सीखना और ज्ञान (Learning and Knowledge)

3. पाठ्यचर्चा के क्षेत्र, स्कूल के चरणों और मूल्यांकन (Curriculum Areas, School Stages and Assessment)

4. विद्यालय व  कक्षा का वातावरण (School and Classroom Environment)

5. व्यवस्थागत सुधार (Systemic Reforms)

परिप्रेक्ष्य:

सीखना और ज्ञान:

पाठ्यचर्चा के क्षेत्र, स्कूल के चरणों और मूल्यांकन:

विद्यालय व  कक्षा का वातावरण:

व्यवस्थागत सुधार:

Q: राष्ट्रीय पाठ्यचर्य की रुपरेखा-2005 के अनुसार शिक्षक की भूमिका है
 (CTET 2016)
 (a) अधिनाकीय
 (b) अनुमतिपरक
 (c) सुविधादाता
 (d) सतावादी 
(c) सुविधादाता
Q: राष्ट्रीय पाठ्यचर्य की रुपरेखा-2005 के अनुसार अधिगम अपने स्वभव में ……….और ……..है । (CTET 2016) (a) निष्क्रिय, सरल (b) सक्रिय, सामाजिक (c) निष्क्रिय, सामाजिक (d) सक्रिय, सरल
(b) सक्रिय, सामाजिक
Q: एन. सी. एफ-2005 के अनुसार, गलतियाँ इस कारण महत्वपूर्ण होती है (CTET 2015) (a) यह विद्यार्थियों को ‘उतीर्ण’ एवं ‘अनुतीर्ण समूह में वर्गीकृत करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है ।’ (b) यह अध्यापकों को बच्चों को डाँटने के लिए एक तरीका उपलब्ध कराती है (c) यह बच्चे के विचार को अंतर्दृष्टि उपलब्ध कराती है तथा समाधानों को पचानाने में सहायता करती है (d) यह कक्षा में कुछ बच्चों को हटाने के लिए आधा स्थान उपलब्ध कराती है
(c) यह बच्चे के विचार को अंतर्दृष्टि उपलब्ध कराती है तथा समाधानों को पचानाने में सहायता करती है

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